भरमाड़ में हुआ साईं बाबा का शताब्दी समारोह का आयोजन

पांचवा शिर्डी साईं दरबार भरमाड़ में शिरडी की तर्ज पर साईं बाबा का महा शताब्दी समारोह का आयोजन किया गया | इस दौरान हज़ारो की तादात में श्रद्धालुओं ने समारोह में भाग लिया व महा शताब्दी समारोह हर्ष उल्लास के साथ मनाया। जानकारी के अनुसार सुगाल से भरमाड चौक तक साईं बाबा के जयकारों के साथ बाबा की शोभायात्रा धूमधाम से निकाली गई । शोभायात्रा निकालकर साई मंडली भरमाड्ड व पांचवा दरबार के सदस्यों ने साईं बाबा की महिमा का गुणगान किया । इस दौरान सारा क्षेत्र भक्तिमय हो गया । समारोह समारोह की शुरुआत सुबह 4:00 बजे साईं बाबा के अभिषेक पूजा के साथ हुई । बाबा को नवीन गुलाबी पोशाक धारण करवाई गई व मंदिर को सुगंधित पुष्पों , सजावटी समान से सजाया गया । इसके अलावा झांकी के लिए भी विशेष तैयारियां की गई व बच्चों द्वारा डांडिया नृत्य व अभिषेक पूजा के बाद मंदिर सदस्यों ,भक्तों के सामूहिक आरती की व देर रात तक मंदिर परीसर में भक्तों का तांता लगा रहा । दिल्ली,चंडीगढ़, शिमला, कांगड़ा,हमीरपुर, राजस्थान , बिलासपुर सहित अन्य जगहों से श्रद्धालुओं इस समारोह मे भाग लेने के लिए पुहुचें । इस दौरान गायक राजेश ने अपनी मधुर आवाज में ओम साईं राम जय साईं राम ,शिर्डी वाले साईं बाबा और मेरे बाबा रहम नजर करना , मैं साई दे लड़ लग गया ,दीवाना तेरा आया बाबा तेरी शिर्डी में जैसे भजनों से साईं बाबा की महिमा का गुणगान किया गया व मंदिर मे भक्तों को नाचने पर मजबूरकर दिया । पाँचवा साईं बाबा मंदिर भरमाड में सजी बाबा व अन्य देवताओं की झांकियां के लिए दर्शन के लिए दूर दराज से आए भक्तों की भीड़ उमड़ी रही । गाजे बाजे ,डी जे, मशहूर ढोल व कलाकारों के के साथ साईं बाबा की पालकी यात्रा निकाली गई । वही मंदिर परिसर में साई बाबा पर लघु नाटिका प्रस्तुत की गई जिसके माध्यम से भक्ति को साई के जीवन के बारे मे बतया गया। समारोह के दौरान प्रस्तुत लघु नाटिका का सभी ने खूब सराहना की । समारोह के समापन पर विशाल भंडारे व भजन संध्या का आयोजन किया गया । साई भक्त व पुजारी राजेश बतया की इस पालकी यात्रा निकालने का मुख्य उद्देश्य क्षेत्र में धर्मनिरपेक्षता और सभी समुदाय समुदाय में सद्भावना कायम करने करना रहा है , साईं परिवार बाबा के सिखाये रास्तों पर चलते है व वह समाज में सद्भावना और आपसी सौहार्द कायम रखने के लिए प्रयत्नशील हता है ।उन्होंने कहा कि इंसान की फितरत में शामिल है कि वे आपस में झगड़ लेते हैं। यह तो भगवान की कृपा है कि उन्होंने से बाबा के रूप में हमें यह बताने वाला स्वरूप दिया कि सबका मालिक एक है। इसी तहजीब को हम आगे भी बनाए रखे , यही कामना की । उन्होंने कहा कि साधु संतों का काम ही होता है, समाज को नई दृष्टि देना। साईं ने भी भक्त की दृष्टि लाकर समाज को नई दिशा प्रदान की। भगवान को आंखों से नहीं दिल की आंखों से देखना चाहिए। उक्त विचार के साथ माह शताब्दी समारोह का आयोजन किया गया। । क्षेत्र में निकाली गई पालकी यात्रा से पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया है । झांकी के दौरान साईं बाबा की पालकी व श्रद्धालुओं ने प्रसाद कहां गया प्रसाद वितरित किया गया । मंदिर में विशेष आतिशबाजी भी की गई।

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