गोविन्द सागर झील में जैव विविधता को पुनर्जिवित करने के लिए एक दिवसीय कार्यशाला आयोजित

वेटलैंडस इंटरनेशनल, साउथ एशिया और बॉम्बे नेचुरल हिस्ट्री सोसाइटी द्वारा आयोजित गोविन्द सागर झील में एकीकृत प्रबन्धन परियोजना के तहत शामिल किये जाने वाले बिन्दु व तथ्य से इस क्षेत्र में प्रवासी पक्षियों की आमद के लिए किये जाने वाले प्रयासों में अत्याधिक प्रभावी सावित होगें। यह विचार आज वन मण्डाधिकारी बिलासपुर अवनी भुषण राय ने वेटलैंडस इंटरनेशनल साउथ एशिया और बॉम्बे नेचुरल हिस्ट्री सोसाइटी द्वारा गोविन्द सागर झील के लिए एकीकृत प्रबन्धन योजना के विषय पर सागर व्यू होटल में गोविन्द सागर झील  हितधारकों के साथ बुलाई गई प्रामर्श बैठक व कार्याशाला की अध्यक्षता करते हुए यह विचार व्यक्त किये। उन्होने कहा कि इस योजना के तहत गोविन्द सागर झील क्षेत्र में जैविक विविधता को पुनर्जिवित करने व प्रवासी पक्षियों के आवागमन की वढोतरी के साथ साथ समबद्ध विभिन्न विभागों की क्षमता का विकास भी होगा तथा आगामी समय में पर्यटन को भी बढावा मिलेगा। हिमाचल प्रदेश राज्य वेटलैडस प्राधिकरण अधिकारी रवि शर्मा ने कहा कि गोविन्द सागर झील हिमाचल प्रदेश की तीस महत्वपुर्ण वेटलैडस में से एक है। यह परियोजना वेटलैंडस संरक्षण को एकीकृत रूप से सुदृढ करने के लिए अत्यतं महत्वपूर्ण है। उन्होने झील में गाद जैसे महत्वपूर्ण मुददों का भी जिक्र किया।  उन्होने कहा कि यह वेटलैंडंस संरक्षण और जैव विविधता के लिए महत्वपूर्ण है। इसीलिए गोविन्द सागर झील का सरक्षण अत्यतं आवश्यक है।

जूलॉजीकल सर्वे ऑफ इण्डिया देहरादून के प्रभारी निदेशक अनिल कुमार ने वन्य जीवन के लिए वेटलैंड को अत्यंत महत्वपूर्ण बताया साथ ही उन्होने पक्षियों के आवासीय विनाश, जलवायू परिवर्तन जैसे प्रमुख खतरो के प्रति भी इंगित किया। प्रवासी पक्षियों के संरक्षण के लिए आद्र भूमि के महत्व व आवश्यकताओं पर सहायक वन सरंक्षक बिलासपुर ने अपने विचार प्रकट किये। वेटलैंडस इंटरनेशनल साउथ एशिया और बॉम्बे नेचुरल हिस्ट्री सोसाइटी के विषय विशेषज्ञों ने तकनीकी सत्रों का नेतृत्व किया। वेटलैंडस इंटरनेशनल के वरिष्ठ तकनीकी अधिकारी धु्रव वर्मा ने भारत सरकार के जलीय परिस्थितिक तंत्र के संरक्षण के लिए वेटलैंडस संरक्षण व बेहतर उपयोग के लिए एकीकृत प्रंबधन योजना के सम्बन्ध मे जानकारी दी। बीएनआईआईएस के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ सुब्रत देबता  ने बैठक व कार्याशाला में उपस्थित हितधारकों को सैन्ट्रल एशिया फलाईवे की राष्ट्रीय कार्य योजना के सम्बन्ध में जानकारी दी।

उन्होने बताया कि गोविन्द सागर झील एकीकृत प्रबन्धन योजना के अन्तर्गत प्राप्त सुझावों के मुख्य बिन्दुओं पर रिपोर्ट बनाकर केन्द्रिय ऐजेसिंयो को सौंपा जाएगा ताकि वेटलैड के रूप में इसका निर्माण व वेहतर इस्तेमाल कर जैव विविधता को बढावा दिया जा सके। उन्होने बताया कि इस कार्यशाला में 50 हितकारकों न भाग लिया। तकनीकी अधिकारी आर्घ्य चक्रवर्ती ने गोविन्द सागर मे परिस्थितिकीय स्थिती को संरक्षित करने तथा परियोजना के उदेश्यों व परिणामों कों सांझा किया। कनिष्ठ तकनीकी अधिकारी अपूर्व थापा ने गोविन्द सागर की परिस्थितिक स्थिती व प्रबन्धन की आवश्यकताओं पर विचार व्यक्त किये। चर्चा सत्रों में विभिन्न विभागों के अधिकारियों तथा स्थानीय हितधारकों द्वारा परियोजना के तहत होने वाले लाभों चुनौतियों व खतरों के प्रति अपने अमुल्य सुझाव प्रकट किये। चर्चा  के तहत उभरे विचार बिन्दुओं में सम्बद्ध विभागों के साथ साथ बीबीएमबी के साथ निरन्तर एकीकृत संस्थागत रूपरेखा तैयार करने की आवश्यकता पर बल दिया गया ताकि अपशिष्ठ प्रबन्धन व्यवस्था में सुधार किया जा सके।

 

Vishal Verma

20 वर्षों के अनुभव के बाद एक सपना अपना नाम अपना काम । कभी पीटीसी चैनल से शुरू किया काम, मोबाईल से text message के जरिये खबर भेजना उसके बाद प्रिंट मीडिया में काम करना। कभी उतार-चड़ाव के दौर फिर खबरें अभी तक तो कभी सूर्या चैनल के साथ काम करना। अभी भी उसके लिए काम करना लेकिन अपने साथियों के साथ third eye today की शुरुआत जिसमें जो सही लगे वो लिखना कोई दवाब नहीं जो सही वो दर्शकों तक