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मर्ज किए जा रहे स्कूलों में एक CBSE तो दूसरा होगा एचपी बोर्ड का स्कूल : रोहित ठाकुर

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मंडी में पत्रकारों से अनौपचारिक बातचीत के दौरान शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर ने शिक्षा व्यवस्था में बड़े बदलाव का संकेत दिया है। उन्होंने बताया कि जिन शहरों या क्षेत्रों में लड़कों और लड़कियों के लिए अलग-अलग स्कूल संचालित हैं और जिन्हें सरकार सीबीएसई बोर्ड के अधीन लाने की योजना बना रही है, वहां पहले उन स्कूलों को को-एजुकेशन के दायरे में लाया जाएगा। इस संबंध में शिक्षा विभाग ने आवश्यक आदेश भी जारी कर दिए हैं।शिक्षा मंत्री के अनुसार सरकार की मंशा यह है कि ऐसे शहरों में एक स्कूल को सीबीएसई बोर्ड के अधीन और दूसरे को एचपी बोर्ड के अधीन रखा जाए। इससे विद्यार्थियों और अभिभावकों को अपनी सुविधा, पसंद और भविष्य की योजना के अनुसार शिक्षा बोर्ड चुनने का विकल्प मिलेगा। उन्होंने बताया कि मंडी शहर में भी गर्ल्स और बॉयज स्कूलों को मर्ज कर को-एजुकेशन बनाया जा रहा है, जहां एक संस्थान सीबीएसई और दूसरा एचपी बोर्ड से संचालित होगा।

तीन साल में 1300 प्राइमरी स्कूलों का मर्जर
शिक्षा मंत्री ने बताया कि पिछले तीन वर्षों में प्रदेश सरकार ने लगभग 1300 प्राइमरी स्कूलों का विलय किया है। उन्होंने कहा कि कई स्कूलों में विद्यार्थियों की संख्या बेहद कम या शून्य थी, जिसके कारण संसाधनों के बेहतर उपयोग के लिए उन्हें पास के स्कूलों में मर्ज किया गया। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि स्कूल मर्जर की प्रक्रिया केवल राज्य तक सीमित नहीं है, बल्कि केंद्र स्तर पर भी लागू की जा रही है। देशभर में अब तक करीब 90 हजार स्कूलों को विभिन्न कारणों से मर्ज किया जा चुका है।

सरकारी स्कूलों में घटती नामांकन संख्या चिंता का विषय
रोहित ठाकुर ने बताया कि पिछले 20–22 वर्षों में सरकारी स्कूलों में दाखिले की संख्या में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई है। उन्होंने कहा कि जन्म दर में कमी भी इसका एक बड़ा कारण है। आंकड़ों के अनुसार करीब 20 वर्ष पहले कक्षा 1 से 8 तक लगभग 9 लाख 71 हजार छात्र नामांकित थे, जबकि वर्तमान में यह संख्या घटकर लगभग 4 लाख 2 हजार रह गई है। सरकार का कहना है कि नई नीतियों और संरचनात्मक बदलावों के माध्यम से शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने और संसाधनों का बेहतर उपयोग सुनिश्चित करने की दिशा में कदम उठाए जा रहे हैं।

Vishal Verma

20 वर्षों के अनुभव के बाद एक सपना अपना नाम अपना काम । कभी पीटीसी चैनल से शुरू किया काम, मोबाईल से text message के जरिये खबर भेजना उसके बाद प्रिंट मीडिया में काम करना। कभी उतार-चड़ाव के दौर फिर खबरें अभी तक तो कभी सूर्या चैनल के साथ काम करना। अभी भी उसके लिए काम करना लेकिन अपने साथियों के साथ third eye today की शुरुआत जिसमें जो सही लगे वो लिखना कोई दवाब नहीं जो सही वो दर्शकों तक