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BBMB मामले में सुप्रीम कोर्ट में हिमाचल की ऐतिहासिक जीत, सुक्खू सरकार की दृढ़ इच्छाशक्ति से प्रदेश को मिलेगा अरबों का राजस्व

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कांग्रेस जिला अध्यक्ष सुभाष वर्मानी ने भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड (BBMB) के एरियर मामले में सर्वोच्च न्यायालय (सुप्रीम कोर्ट) द्वारा हिमाचल प्रदेश के पक्ष में सुनाए गए फैसले का जोरदार स्वागत किया है। जिला अध्यक्ष ने इसे प्रदेश के इतिहास में एक और बड़ा मील का पत्थर बताते हुए कहा कि मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू की नेक नीयत, दृढ़ इच्छाशक्ति और सच्ची लगन के कारण ही आज हिमाचल को यह ऐतिहासिक अधिकार मिला है। यह जीत केवल सरकार की नहीं, बल्कि हर एक प्रदेशवासी की जीत है।
किशाऊ बांध परियोजना के बाद हक की यह चौथी बड़ी जीत
सुभाष वर्मानी ने कहा कि वर्तमान प्रदेश सरकार ने अपने कार्यकाल में हिमाचल के अधिकारों से जुड़े चार बड़े मामलों में ऐतिहासिक जीत हासिल की है, जिसमें वाइल्ड फ्लावर हॉल, जेएसडब्ल्यू (JSW) और 15,624 करोड़ रुपये की किशाऊ बहुउद्देशीय बांध परियोजना (Kishau Multipurpose Project) के बाद अब यह BBMB की चौथी बड़ी जीत है।
उन्होंने याद दिलाया कि मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने पिछले दिनों किशाऊ बांध परियोजना मामले में ऐतिहासिक सफलता हासिल कर हिमाचल के हितों का संरक्षण किया था। पिछली भाजपा सरकार जहां राज्य पर 800 करोड़ रुपये का अतिरिक्त वित्तीय बोझ डालने पर सहमत हो गई थी, वहीं मुख्यमंत्री सुक्खू ने उस समझौते को खारिज कर हिमाचल के लिए ‘जीरो इन्वेस्टमेंट’ (Zero Investment) की शर्त मनवाई। इस ऐतिहासिक किशाऊ समझौते के तहत हिमाचल को बिना एक भी पैसा खर्च किए हर साल 100 करोड़ यूनिट (1000 मिलियन यूनिट) बिजली का अधिकार मिला, जिससे प्रदेश को सालाना लगभग 1000 से 1200 करोड़ रुपये का सीधा राजस्व प्राप्त होगा। किशाऊ बांध की इस बड़ी जीत के तुरंत बाद अब सरकार ने BBMB मामले में भी राज्य का लोहा मनवा दिया है।
BBMB के एरियर से चमकेगी हिमाचल की ग्रामीण अर्थव्यवस्था
जिला अध्यक्ष ने मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू के चंबा के मैहला में दिए गए बयान का हवाला देते हुए बताया कि BBMB के एरियर के इस 15 साल पुराने मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद हिमाचल को 55 करोड़ मिलियन यूनिट बिजली वापस मिलेगी, जो BBMB को आगामी 20 वर्षों के भीतर राज्य को लौटानी होगी।
यदि इस बिजली को न्यूनतम 6 रुपये प्रति यूनिट की दर से भी बेचा जाता है, तो सरकार को हर साल 500 करोड़ रुपये का अतिरिक्त राजस्व प्राप्त होगा। वहीं, राजस्थान की तर्ज पर अन्य राज्यों के साथ 15.50 रुपये प्रति यूनिट की दर से बिजली खरीद समझौता होने पर यह सालाना राजस्व लगभग 1000 करोड़ रुपये तक पहुंच जाएगा। इस भारी-भरकम राशि से प्रदेश में सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को एक अभूतपूर्व मजबूती मिलेगी।
भाजपा की ‘डबल इंजन’ सरकार की नाकामी उजागर
सुभाष वर्मा ने पूर्ववर्ती भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सरकार को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि केंद्र और राज्य में ‘डबल इंजन’ की सरकार होने के बावजूद भाजपा ने कभी हिमाचल के हक की यह लड़ाई नहीं लड़ी। भाजपा नेता हिमाचल के हितों की रक्षा और संरक्षण करने में पूरी तरह विफल रहे हैं।
उन्होंने मुख्यमंत्री के सुर में सुर मिलाते हुए कहा कि जो लोग अपने राज्य के हितों का संरक्षण नहीं कर सकते, वे प्रदेश हित की लड़ाई कभी नहीं जीत सकते। एक तरफ जहां सुक्खू सरकार ने दिन-रात एक करके हिमाचल के स्वाभिमान की लड़ाइयां जीती हैं, वहीं दूसरी तरफ भाजपा सिर्फ हिमाचल के हितों को नजरअंदाज करने और विधायक चोरी की ओछी राजनीति में जुटी रही।
2032 तक देश का सबसे समृद्ध राज्य बनेगा हिमाचल
वर्मा ने कहा कि रेवेन्यू डेफिसिट ग्रांट (RDG) बंद होने के बावजूद मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू जी के नेतृत्व में हिमाचल प्रदेश सही दिशा में आगे बढ़ रहा है। संगठन और जिला कांग्रेस को पूरा विश्वास है कि वर्तमान सरकार की जनकल्याणकारी नीतियों के दम पर हिमाचल प्रदेश वर्ष 2032 तक हिंदुस्तान का सबसे अमीर और समृद्धशाली राज्य बनकर उभरेगा।
वाटर सेस और चंडीगढ़ के हक के लिए भी जारी रहेगी लड़ाई
जिला अध्यक्ष ने अंत में कहा कि किशाऊ बांध और BBMB मामलों में मिली ये जीत तो महज शुरुआत है। अभी ‘वाटर सेस’ (Water Cess) और चंडीगढ़ में हिमाचल प्रदेश के जायज हिस्से व हक को हासिल करने की लड़ाई शेष है, जिसे मुख्यमंत्री पूरी मजबूती से लड़ रहे हैं। जैसे-जैसे सरकार अपने अधिकार जीतती जा रही है, वैसे-वैसे उसका लाभ सीधे प्रदेश की जनता तक नई-नई योजनाओं के रूप में पहुँचाया जा रहा है। जिला कांग्रेस मुख्यमंत्री के हर जनहितैषी फैसले के साथ चट्टान की तरह खड़ी है।

Vishal Verma

20 वर्षों के अनुभव के बाद एक सपना अपना नाम अपना काम । कभी पीटीसी चैनल से शुरू किया काम, मोबाईल से text message के जरिये खबर भेजना उसके बाद प्रिंट मीडिया में काम करना। कभी उतार-चड़ाव के दौर फिर खबरें अभी तक तो कभी सूर्या चैनल के साथ काम करना। अभी भी उसके लिए काम करना लेकिन अपने साथियों के साथ third eye today की शुरुआत जिसमें जो सही लगे वो लिखना कोई दवाब नहीं जो सही वो दर्शकों तक