Third Eye Today News

2011 में धूमल सरकार के कार्यकाल में सर्वाेच्च न्यायालय ने हिमाचल के 7.19 प्रतिशत हिस्से को दी थी कानूनी मान्यता: बिंदल

Spread the love

बीबीएमबी पर हिमाचल की ऐतिहासिक जीत की नींव प्रो. प्रेम कुमार धूमल के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार के संघर्ष से पड़ी, केंद्र के सहयोग से मिला निर्णायक समाधान रू डॉ. राजीव बिंदल
2011 में धूमल सरकार के कार्यकाल में सर्वाेच्च न्यायालय ने हिमाचल के 7.19 प्रतिशत हिस्से को दी थी कानूनी मान्यता: बिंदल
मोदी सरकार के कैशलेस सेटलमेंट फॉर्मूले से हिमाचल को मिलेगी 1197 करोड़ यूनिट बिजली, मुख्यमंत्री सुक्खू श्रेय लेने के बजाय जनता को बताएं पूरा इतिहास: बिंदल
शिमला, 7 नवंबर 2026 । भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. राजीव बिंदल ने भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड (बीबीएमबी) की जलविद्युत परियोजनाओं में हिमाचल प्रदेश के लंबित बिजली बकाये को लेकर सर्वाेच्च न्यायालय के 6 नवंबर 2026 के ऐतिहासिक निर्णय का स्वागत किया है।
डॉ. बिंदल ने इस ऐतिहासिक समाधान के लिए प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय ऊर्जा मंत्री श्री मनोहर लाल खट्टर और केंद्र सरकार का आभार व्यक्त किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि हिमाचल के हितों के संरक्षण के लिए केंद्र और राज्य के बीच सकारात्मक सहयोग अत्यंत आवश्यक है ।

उन्होंने कहा कि यह निर्णय हिमाचल प्रदेश की जनता के अधिकारों की बड़ी जीत है। इस ऐतिहासिक उपलब्धि के पीछे दशकों की कानूनी लड़ाई, पूर्व मुख्यमंत्री प्रो. प्रेम कुमार धूमल के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार के कार्यकाल में मिली निर्णायक न्यायिक सफलता और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार द्वारा प्रस्तुत समाधान की महत्वपूर्ण भूमिका रही है ।
डॉ. बिंदल ने कहा कि मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू इस निर्णय का राजनीतिक श्रेय लेने के बजाय प्रदेश की जनता को इसका पूरा इतिहास बताएं ।
डॉ. बिंदल ने कहा कि इस संघर्ष की जड़ें वर्ष 1966 में पंजाब के पुनर्गठन से जुड़ी हैं । हिमाचल प्रदेश ने 1969 में अपनी हिस्सेदारी का दावा केंद्र सरकार के समक्ष रखा था। विभिन्न स्तरों पर प्रयासों के बावजूद समाधान नहीं निकलने पर वर्ष 1996 में सर्वाेच्च न्यायालय में मूल वाद दायर किया गया। इसके बाद प्रदेश के अधिकारों की लंबी कानूनी लड़ाई चली।
उन्होंने कहा कि 1998 से 2003 तथा 2007 से 2012 तक भाजपा सरकार के कार्यकाल में प्रदेश के अधिकारों से जुड़े इस विषय को महत्वपूर्ण स्थान मिला। विशेष रूप से धूमल सरकार के दूसरे कार्यकाल में 27 सितंबर 2011 को सर्वाेच्च न्यायालय ने ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए हिमाचल प्रदेश के 7.19 प्रतिशत हिस्से के कानूनी अधिकार को मान्यता दी। इस निर्णय ने वर्षों से लंबित विवाद के समाधान की मजबूत आधारशिला रखी।
डॉ. बिंदल ने कहा कि यह तथ्य किसी भी स्थिति में भुलाया नहीं जा सकता कि जब सर्वाेच्च न्यायालय ने हिमाचल के अधिकारों को मान्यता दी, उस समय प्रदेश में प्रो. प्रेम कुमार धूमल के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार थी।
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि वर्ष 2012 में कांग्रेस सरकार बनने के बाद भी बिजली के बकाये का अंतिम निपटारा नहीं हो सका। उन्होंने कांग्रेस से सवाल किया कि जब 2011 में हिमाचल के अधिकारों का निर्धारण हो चुका था, तो उसके बाद वर्षों तक प्रदेश को उसका पूरा बकाया क्यों नहीं मिल पाया ?
उन्होंने कहा कि भाजपा सरकारों के प्रयासों और केंद्र सरकार के सहयोग की भूमिका को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। वर्ष 2017 से 2022 के बीच जयराम ठाकुर के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार के कार्यकाल सहित विभिन्न चरणों में यह मामला प्रदेश के हितों से जुड़ा महत्वपूर्ण विषय बना रहा। हालांकि 2011 के निर्णय को लागू करने के लिए बिजली की गणना, दरों और परियोजनाओं की पूंजीगत लागत जैसे जटिल प्रश्नों का समाधान आवश्यक था।
डॉ. बिंदल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार ने इस लंबे विवाद के समाधान में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। केंद्र सरकार की ओर से भारत के महान्यायवादी द्वारा प्रस्तुत कैशलेस सेटलमेंट फॉर्मूले ने वर्षों से लंबित विवाद को सुलझाने का व्यावहारिक रास्ता उपलब्ध कराया। इसके अंतर्गत नकद भुगतान के स्थान पर बिजली के रूप में बकाये का निपटारा करने की व्यवस्था प्रस्तुत की गई, जिसे सर्वाेच्च न्यायालय ने स्वीकार किया।
उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार द्वारा की गई गणना के अनुसार हिमाचल प्रदेश का कुल बिजली बकाया 13,066 मिलियन यूनिट निर्धारित हुआ। इसमें प्रदेश की ₹420.77 करोड़ की पूंजीगत देनदारी को ₹3.85 प्रति यूनिट की दर से समायोजित करने पर लगभग 1,093 मिलियन यूनिट की कटौती हुई। इस प्रकार हिमाचल प्रदेश को लगभग 11,973 मिलियन यूनिट बिजली प्राप्त होगी।
सर्वाेच्च न्यायालय के आदेशानुसार पंजाब और हरियाणा अगले 20 वर्षों में अक्टूबर से मार्च के दौरान लगभग 598 मिलियन यूनिट बिजली प्रतिवर्ष उपलब्ध कराएंगे। इस व्यवस्था से हिमाचल प्रदेश को दीर्घकालिक ऊर्जा उपलब्धता में महत्वपूर्ण सहायता मिल सकती है।

उन्होंने कहा कि यह किसी व्यक्ति अथवा दल की व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं, बल्कि हिमाचल प्रदेश के अधिकारों की जीत है। इस संघर्ष में प्रो. प्रेम कुमार धूमल के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार के कार्यकाल में मिली ऐतिहासिक सफलता तथा वर्तमान केंद्र सरकार के समाधानकारी प्रयासों का योगदान महत्वपूर्ण है।

किशाऊ बांध के सफल ।हतममउमदज के लिए भी केवल और केवल केन्द्र की मोदी सरकार का ही योगदान है जिसने 90ः खर्चा वहन करने को स्वीकृति दी है।
माननीय मुख्यमंत्री सुक्खू जी ने तो जिला सिरमौर की जनता के अधिकारों को ही बेच डाला। जिला सिरमौर के किसानों को मिलने वाला पानी दिल्ली व राजस्थान को बेच दिया जिससे पीढ़ी दर पीढ़ी सिरमौर की जनता के सदा के लिए अधिकारों को बेच डाला गया । इसे अपनी उपलब्धि बता रहे हैं

Vishal Verma

20 वर्षों के अनुभव के बाद एक सपना अपना नाम अपना काम । कभी पीटीसी चैनल से शुरू किया काम, मोबाईल से text message के जरिये खबर भेजना उसके बाद प्रिंट मीडिया में काम करना। कभी उतार-चड़ाव के दौर फिर खबरें अभी तक तो कभी सूर्या चैनल के साथ काम करना। अभी भी उसके लिए काम करना लेकिन अपने साथियों के साथ third eye today की शुरुआत जिसमें जो सही लगे वो लिखना कोई दवाब नहीं जो सही वो दर्शकों तक