पर्यटन, परिवहन और पुलिसिंग में नजीर पेश कर रहा अंडमान-निकोबार, प्रति व्यक्ति आय हिमाचल से ज्यादा
बिजली, पेयजल के अलावा तमाम भौगोलिक परिस्थितियों से जूझ रहा अंडमान-निकोबार द्वीप समूह पर्यटन, परिवहन और पुलिसिंग के क्षेत्र में नजीर पेश कर रहा है। चारों तरफ खारे पानी से घिरे अंडमान में भले ही मीठे पानी (पेयजल) का संकट हो लेकिन हर साल आबादी से तीन गुना अधिक पर्यटक आ रहे हैं।
बावजूद इसके यहां की सड़कें गड्ढा रहित हैं। अंडमान ने अपने छोटे से क्षेत्र को चाहे वो ऐतिहासिक स्थल हो या रेतीले बीच, पर्यटन से ऐसा जोड़े हैं कि सैलानी सप्ताह से पहले वापस नहीं लौटते। यहां ट्रैफिक जाम बिल्कुल नहीं है। आम लोग ट्रैफिक नियमों का पालन करते हैं और पर्यटकों से भी करवाते हैं। एक टेंपो ट्रैवलर का चालक खुद तो सीट बेल्ट पहनता है, साथ ही पहली सीट पर बैठने वाले को भी। दोपहिया वाहन में पीछे बैठने वाला भी हेलमेट पहनता है। ऑटो वाला सिर्फ तीन सवारियां ही बैठाता है।
रैश ड्राइविंग पर 3 और बिना इंश्योरेंस गाड़ी चलाने पर 6 माह की जेल का प्रावधान है। विकास में अंडमान हिमाचल से कहीं आगे है। अंडमान की प्रति व्यक्ति आय 2024 में 3,10,143 थी। हिमाचल में अक्तूबर 2025 के आंकड़े के अनुसार 2,57,212 है। 2026 अंत में अंडमान 4 लाख तक पहुंच जाएगा। केंद्र सरकार ने यहां 30 हजार करोड़ का निवेश किया है। 10 हजार करोड़ के और प्रोजेक्ट्स पाइपलाइन में हैं। पर्यटकों के लिए अंडमान के हैवलॉक और नील द्वीप अब थाईलैंड, मलयेशिया व इंडोनिशिया से सस्ते विकल्प बन रहे हैं।
समंदर में एक से दूसरे द्वीप को दौड़ेगी वाटर मेट्रो
अंडमान में न तो कोई रेल है, न ही पटरियां बिछी हैं फिर भी नीले समंदर में मेट्रो दौड़ाने की तैयारी है। सैकड़ों किलोमीटर में फैले विशाल समंदर में बसे तमाम टापुओं को परस्पर जोड़ने का जरिया अब वाटर मेट्रो बनेगी। प्रस्तावित वाटर मेट्रो समंदर की मस्ती और द्वीपों की खूबसूरती के दीदार कराएगी। 2025 में इनलैंड वाटरवेज अथॉरिटी ऑफ इंडिया ने 17 शहरों में अर्बन वाटर ट्रांसपोर्ट सिस्टम की फिजिबिलिटी स्टडी शुरू की थी और इसमें अंडमान-निकोबार को भी जगह मिली है। पोर्ट ब्लेयर से सरकार 20 से ज्यादा द्वीपों के लिए सब्सिडी पर समुद्री जहाज की सुविधा दे रही है। इसमें इंसान ही नहीं जानवर और बड़े वाहन तक जा सकते हैं।
अंडमान में न तो कोई रेल है, न ही पटरियां बिछी हैं फिर भी नीले समंदर में मेट्रो दौड़ाने की तैयारी है। सैकड़ों किलोमीटर में फैले विशाल समंदर में बसे तमाम टापुओं को परस्पर जोड़ने का जरिया अब वाटर मेट्रो बनेगी। प्रस्तावित वाटर मेट्रो समंदर की मस्ती और द्वीपों की खूबसूरती के दीदार कराएगी। 2025 में इनलैंड वाटरवेज अथॉरिटी ऑफ इंडिया ने 17 शहरों में अर्बन वाटर ट्रांसपोर्ट सिस्टम की फिजिबिलिटी स्टडी शुरू की थी और इसमें अंडमान-निकोबार को भी जगह मिली है। पोर्ट ब्लेयर से सरकार 20 से ज्यादा द्वीपों के लिए सब्सिडी पर समुद्री जहाज की सुविधा दे रही है। इसमें इंसान ही नहीं जानवर और बड़े वाहन तक जा सकते हैं।
हिमाचल के सपूत हिरदा राम की वीरता की गवाही दे रहा काला पानी
मंडी से उठी स्वतंत्रता आंदोलन की एक आवाज की गूंज काला पानी अंडमान की सेल्युलर जेल की कोठरियों में आज भी सुनाई देती है। यह आवाज थी हिमाचल के वीर सपूत हिरदा राम की। उस दौर में काला पानी सिर्फ सजा नहीं, बल्कि जिंदा इंसान को तिल-तिल कर तोड़ देने की साजिश थी। कोल्हू में बैलों की तरह जोतकर तेल पिरवाया जाता। कैदी को दोबारा पेशाब या शौच करना हो तो जेल में रखे लोहे के पात्र में ही करना पड़ता था। काला पानी की दीवारें आज भी हिमाचल के इस सपूत के साहस, संघर्ष और बलिदान की गवाही देती हैं।
ड्रिप इरिगेशन में पेश की मिसाल : कृषि और बागवानी उत्पादों के लिए 90 फीसदी तक अन्य राज्यों पर निर्भर रहने वाला अंडमान द्वीप समूह सेंसरयुक्त ड्रिप इरिगेशन का मॉडल पेश कर रहा है। जमीन में जैसे ही पानी की कमी होगी सेंसर से ऑटोमेटिक सिंचाई शुरू हो जाएगी। हिमाचल में सेब और अन्य बागवानी के लिए यह प्रणाली वरदान साबित हो सकती है।
सौर ऊर्जा पर जोर
श्री विजयपुरम (पोर्ट ब्लेयर) चारों तरफ से पानी से घिरा है फिर भी यहां एक भी पावर हाइडल प्रोजेक्ट नहीं है। यहां 65 फीसदी बिजली डीजल से बनाई जाती है। सौर ऊर्जा की हिस्सेदारी 30 प्रतिशत है। 24 घंटे बिजली देने को धौलीगंज में 33 किलोवाट का सोलर पावर प्लांट है। डीजल से बिजली बनाने से हो रहे प्रदूषण को रोकने के लिए सौर ऊर्जा पर जोर दिया जा रहा है।
श्री विजयपुरम (पोर्ट ब्लेयर) चारों तरफ से पानी से घिरा है फिर भी यहां एक भी पावर हाइडल प्रोजेक्ट नहीं है। यहां 65 फीसदी बिजली डीजल से बनाई जाती है। सौर ऊर्जा की हिस्सेदारी 30 प्रतिशत है। 24 घंटे बिजली देने को धौलीगंज में 33 किलोवाट का सोलर पावर प्लांट है। डीजल से बिजली बनाने से हो रहे प्रदूषण को रोकने के लिए सौर ऊर्जा पर जोर दिया जा रहा है।
आदिवासी प्रजाति जारवा को संरक्षण : अंडमान अपनी आदिवासी प्रजाति जारवा को सरंक्षित कर रहा है जो पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र रहती है। 400 के करीब जारवा अभी भी जंगल के 50 किमी क्षेत्र में रहते हैं। वहीं, निकोबार में अभी भी आम लोग नहीं जा सकते। यहां लोग अभी भी आदिवासी जीवन जीते हैं।
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