गुरुकुल इंटरनेशनल सीनियर सेकेंडरी स्कूल, सोलन का 20वाँ वार्षिक समारोह भव्यता एवं सांस्कृतिक गरिमा के साथ संपन्न
‘चरैवेति चरैवेति – यात्रा निरंतर जारी है’ का संदेश बना समारोह का मुख्य आकर्षण
आधुनिकता के साथ भारतीय संस्कृति एवं परंपराओं का अद्भुत संगम
*सोलन, 5 नवंबर 2026:* गुरुकुल इंटरनेशनल सीनियर सेकेंडरी स्कूल, सोलन ने अपना 20वाँ वार्षिक समारोह अत्यंत भव्यता, उत्साह और सांस्कृतिक गरिमा के साथ मनाया। इस वर्ष समारोह की केंद्रीय विषयवस्तु *‘चरैवेति चरैवेति – यात्रा निरंतर जारी है’* रही, जिसने उपस्थित अतिथियों, अभिभावकों और दर्शकों को निरंतर आगे बढ़ने, परिश्रम करने तथा अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़े रहने का प्रेरणादायक संदेश दिया।
समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में कर्नल राजीव थॉमस, कमांडिंग ऑफिसर (1 एच०पी० एन ० सी० सी ० बटालियन सोलन) उपस्थित रहे। डॉ. देविना वैद्य, निदेशक, अनुसंधान, डॉ. यशवंत सिंह परमार औद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय, नौणी (सोलन)।
तथा श्रीमती सुषमा शर्मा, महापौर, नगर निगम सोलन विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहीं। श्री गौरव राजपूत, उपमहापौर, नगर निगम सोलन ने विशेष आमंत्रित अतिथि के रूप में समारोह की शोभा बढ़ाई। इसके अतिरिक्त विद्यालय प्रबंधन समिति के सभी सम्मानित सदस्यों, गणमान्य व्यक्तियों, अभिभावकों एवं समस्त विद्यालय परिवार की गरिमामयी उपस्थिति ने आयोजन को और भी विशेष बना दिया।
समारोह का सबसे आकर्षक एवं भावपूर्ण पक्ष इसकी रंगारंग सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ रहीं, जिनमें विद्यार्थियों ने भारतीय सभ्यता, संस्कृति, आध्यात्मिकता और जीवन दर्शन को मंच पर जीवंत कर दिया। रामायण एवं महाभारत के प्रेरणादायक प्रसंगों के माध्यम से मर्यादा, धर्म, कर्तव्य, सत्य, साहस और कर्मयोग जैसे शाश्वत जीवन मूल्यों को अत्यंत प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया गया। पंचतत्त्व – पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु और आकाश के माध्यम से प्रकृति एवं मानव जीवन के अटूट संबंध को कलात्मक अभिव्यक्ति दी गई। विद्यार्थियों की मनमोहक नृत्य प्रस्तुतियों, नाट्य मंचन, संगीत और विविध सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने दर्शकों का मन मोह लिया। प्रत्येक प्रस्तुति में विद्यार्थियों की प्रतिभा, आत्मविश्वास, अनुशासन, रचनात्मकता और कठिन परिश्रम की झलक दिखाई दी। उपस्थित अभिभावकों एवं अतिथियों ने तालियों की गड़गड़ाहट के साथ विद्यार्थियों का उत्साहवर्धन किया।
इस वार्षिक समारोह की सबसे बड़ी विशेषता यह रही कि यह केवल मनोरंजन और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों तक सीमित नहीं था, बल्कि भारतीय संस्कृति एवं परंपराओं से गहराई से जुड़ा एक वैचारिक और प्रेरणादायक आयोजन था। आधुनिक शिक्षा, विज्ञान, तकनीक और बदलते वैश्विक परिवेश के साथ कदम मिलाते हुए अपनी सांस्कृतिक विरासत, संस्कारों और मूल्यों को सहेजकर रखने का संदेश पूरे समारोह में प्रमुखता से उभरकर सामने आया। *‘परंपरा के साथ आधुनिकता’* की भावना को विद्यार्थियों ने अपनी प्रस्तुतियों के माध्यम से अत्यंत सुंदरता से साकार किया।
