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कबाड़ में मिली 37 साल पुरानी विरासत, सेक्टर-17 चंडीगढ़ से सामने आया सोलन का इतिहास

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कहते हैं वक्त की धूल इतिहास को भले ही ढक दे, मगर उसे मिटा नहीं सकती। ऐसा ही एक अनोखा मामला चंडीगढ़ के सेक्टर-17 बस स्टैंड से सामने आया है, जहां कबाड़ के ढेर में सोलन बस स्टैंड कॉम्प्लेक्स की 37 साल पुरानी शिलान्यास पट्टिका बरामद हुई। इस खोज ने न केवल हिमाचल पथ परिवहन निगम (HRTC) के कर्मचारियों को चौंकाया, बल्कि प्रदेश के विकास इतिहास की एक महत्वपूर्ण कड़ी को भी फिर से उजागर कर दिया।

मामला उस समय सामने आया जब सेक्टर-17 बस स्टैंड की छत पर चालकों-परिचालकों के विश्राम कक्ष के पास पड़े कबाड़ पर एचआरटीसी के बुकिंग काउंटर कर्मी नवीन ठाकुर की नजर पड़ी। धूल में दबा पत्थर का एक टुकड़ा उन्हें असामान्य लगा। जब उसे साफ किया गया, तो उस पर खुदे अक्षरों ने सबको हैरान कर दिया।

यह पट्टिका सोलन बस स्टैंड कॉम्प्लेक्स की शिलान्यास पट्टिका निकली, जिसका उद्घाटन 17 जून 1989 को तत्कालीन मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने किया था। उस समय प्रदेश के परिवहन मंत्री जय बिहारी लाल खाची थे, जबकि तत्कालीन स्वास्थ्य राज्य मंत्री विजेंद्र सिंह समारोह में विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे थे। यह दौर हिमाचल प्रदेश के बुनियादी ढांचे के विस्तार और विकास का अहम चरण माना जाता है।

पट्टिका के चंडीगढ़ के कबाड़ तक पहुंचने को लेकर अब कई सवाल उठ रहे हैं। क्या किसी जीर्णोद्धार या निर्माण कार्य के दौरान इसे हटाया गया? या प्रशासनिक लापरवाही के चलते यह मलबे के साथ चंडीगढ़ पहुंच गई? फिलहाल इन सवालों के स्पष्ट उत्तर मिलना मुश्किल प्रतीत होता है।

नवीन ठाकुर ने सजगता दिखाते हुए पट्टिका को कबाड़ से निकालकर सुरक्षित स्थान पर रखवाया। बाद में इसे पूरे सम्मान के साथ निगम कार्यालय में स्थापित किया गया। निगम कर्मचारियों की मांग है कि इस ‘खोई हुई विरासत’ को दिवंगत मुख्यमंत्री के पुत्र और वर्तमान लोक निर्माण विभाग (PWD) मंत्री विक्रमादित्य सिंह को सौंपा जाए, ताकि इसे पुनः सोलन बस स्टैंड पर स्थापित किया जा सके।

यह 37 वर्ष पुरानी शिलान्यास पट्टिका केवल पत्थर का एक टुकड़ा नहीं, बल्कि हिमाचल के विकास की यात्रा का जीवंत दस्तावेज है। किसी भी भवन की पहचान और इतिहास उसकी शिलान्यास पट्टिका से जुड़ा होता है। अब देखना यह होगा कि कबाड़ से निकली यह ऐतिहासिक धरोहर अपनी मूल जगह सोलन लौटती है या किसी दफ्तर की अलमारी तक सीमित रह जाती है।

इतना तय है कि नवीन ठाकुर की सतर्कता ने इतिहास के एक भूले हुए अध्याय को फिर से जीवंत कर दिया है।

Vishal Verma

20 वर्षों के अनुभव के बाद एक सपना अपना नाम अपना काम । कभी पीटीसी चैनल से शुरू किया काम, मोबाईल से text message के जरिये खबर भेजना उसके बाद प्रिंट मीडिया में काम करना। कभी उतार-चड़ाव के दौर फिर खबरें अभी तक तो कभी सूर्या चैनल के साथ काम करना। अभी भी उसके लिए काम करना लेकिन अपने साथियों के साथ third eye today की शुरुआत जिसमें जो सही लगे वो लिखना कोई दवाब नहीं जो सही वो दर्शकों तक