अर्की अग्निकांड : मलबे से मिल रहे मानव अवशेष, यह तय करना मुश्किल..एक श.व या कई
हिमाचल प्रदेश में बीते कुछ दिनों के भीतर घटित दो दर्दनाक हादसों ने पूरे प्रदेश को झकझोर कर रख दिया है। एक ओर माघी पर्व से ठीक पहले हरिपुरधार में हुए भीषण सड़क हादसे में 14 लोगों की असमय मौत ने प्रदेश को गहरे शोक में डुबो दिया, वहीं इस हादसे के जख्म अभी भरे भी नहीं थे कि सोलन जिले के अर्की में हुए भीषण अग्निकांड ने त्रासदी को और भयावह बना दिया। इन दोनों घटनाओं को मिलाकर त्योहारों से पहले कुल 17 लोग जिंदगी की जंग हार चुके हैं।लोहड़ी का पर्व जहां उल्लास, उमंग और खुशियों का संदेश देता है, वहीं अर्की में घटित भीषण अग्निकांड की त्रासदी ने त्योहारों के इस मौसम में पूरे क्षेत्र को शोक और सन्नाटे में डुबो दिया है। हालात इतने भयावह हैं कि कई शव अब भी अवशेषों के रूप में मिल रहे हैं, जिससे यह स्पष्ट करना मुश्किल हो गया है कि ये अवशेष एक ही व्यक्ति के हैं या एक से अधिक पीड़ितों के।अर्की अग्निकांड में अभी भी सात लोग लापता बताए जा रहे हैं, जिनके जीवित मिलने की संभावना क्षीण होती जा रही है। भीषण अग्निकांड के बाद राहत एवं बचाव कार्य के दौरान मंगलवार को मलबे से मानव शरीर के कुछ छोटे अवशेष बरामद किए गए, जिन्हें पीड़ितों की पहचान सुनिश्चित करने के लिए डीएनए परीक्षण हेतु फॉरेंसिक साइंस लैब भेजा जा रहा है।
हादसे के बाद से नेपाल मूल के सात लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं। लापता व्यक्तियों में धन बहादुर (35 वर्ष), कविता (33 वर्ष), राधा (16 वर्ष), रेनुका (12 वर्ष), रंजन (2 वर्ष), कंशी राम (48 वर्ष) और टीका (31 वर्ष) शामिल हैं। पुलिस और राहत दल को आशंका है कि ये सभी मलबे के नीचे दबे हो सकते हैं, जिनकी तलाश युद्धस्तर पर जारी है।
घटनास्थल से कई गैस सिलेंडरों की बरामदगी भी हुई है, जिसने हादसे की भयावहता और संभावित लापरवाही की ओर इशारा किया है। इस मामले में पुलिस ने आवश्यक वस्तु अधिनियम (Essential Commodities Act) के तहत भवन मालिक के खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है। पूरे प्रकरण की गहन जांच जारी है।
रेस्क्यू टीमें सुनियोजित ढंग से मलबा, ईंट और पत्थर हटा रही हैं। इस दौरान इस बात का विशेष ध्यान रखा जा रहा है कि किसी अन्य ढांचे को नुकसान न पहुंचे और बचाव कर्मियों की सुरक्षा से कोई समझौता न हो। हर हटता मलबा अपने साथ उम्मीद और आशंका दोनों लेकर सामने आ रहा है। यह घटना अब केवल एक हादसा नहीं रह गई है, बल्कि लापरवाही, नियमों की अनदेखी और व्यवस्था की जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े कर रही है।
गौरतलब है कि सोलन जिले के अर्की बाजार क्षेत्र में रविवार रात को हुए इस भीषण अग्निकांड में प्रारंभिक तौर पर एक बच्चे सहित तीन लोगों की मौत दर्ज की गई थी, जबकि सात लोग लापता बताए गए थे, जिनके मलबे में दबे होने की आशंका जताई गई थी। सोमवार शाम तक प्रशासन और बचाव दलों ने युद्धस्तर पर राहत एवं खोज अभियान जारी रखा।
राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (SDRF), राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (NDRF), होमगार्ड, पुलिस और अग्निशमन विभाग की कई टीमें घटनास्थल पर तैनात हैं। भारी मशीनों के साथ-साथ विशेष रूप से प्रशिक्षित खोजी कुत्तों की मदद से मलबे और आग की राख में लापरता लोगों की तलाश की जा रही है।
प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि आग सबसे पहले एक रिहायशी मकान में लगी थी, जो देखते ही देखते आसपास के मकानों और दुकानों तक फैल गई। इस दौरान करीब आठ एलपीजी सिलेंडरों के फटने से जोरदार धमाके हुए, जिससे आग ने और भी भयावह रूप धारण कर लिया। सिलेंडरों के विस्फोट के कारण स्थिति पूरी तरह से नियंत्रण से बाहर हो गई और दमकल विभाग व बचाव दलों को आग पर काबू पाने में भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। पूरे इलाके में दहशत का माहौल बन गया।
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