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पंचायत चुनाव में नया रोस्टर, 2011 की जनगणना बनेगी आरक्षण का आधार

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हिमाचल प्रदेश में पंचायत चुनावों को लेकर बना संशय समाप्त हो गया है। पंचायतीराज संस्थाओं में इस बार नए सिरे से आरक्षण रोस्टर लागू किया जाएगा। पंचायतीराज विभाग ने स्थिति स्पष्ट करते हुए बताया है कि अनुसूचित जाति, जनजाति और महिलाओं के आरक्षण के लिए 2011 की जनगणना को आधार बनाया जाएगा, जबकि ओबीसी आरक्षण के लिए 1993-94 के सर्वेक्षण को मान्य माना जाएगा।चायत प्रधान के आरक्षण के लिए विकास खंड को इकाई बनाया जाएगा। इस फार्मूले के तहत प्रत्येक विकास खंड में प्रधान पदों का आरक्षण वहां की जनसंख्या अनुपात के अनुसार तय होगा। विभाग को 31 मार्च से पहले आरक्षण रोस्टर जारी करना है। विभाग ने नई पंचायतों तथा जिला परिषद के पुनर्गठन और पुनर्सीमांकन की अधिसूचना भी जारी कर दी है। इस पर सात दिन के भीतर लोगों से आपत्तियां और सुझाव मांगे गए हैं। इस संबंध में सभी उपायुक्तों को स्पष्ट निर्देश दे दिए गए हैं।

उल्लेखनीय है कि अब तक रोस्टर को लेकर असमंजस की स्थिति थी। पंचायत समिति और जिला परिषद स्तर पर महिलाओं के लिए 50 प्रतिशत आरक्षण रहेगा। पिछड़ा वर्ग के लिए अधिकतम 15 प्रतिशत तक आरक्षण का प्रावधान है। पंचायत प्रधान, पंचायत समिति अध्यक्ष और जिला परिषद अध्यक्ष के पदों पर भी यही नियम लागू होंगे। इन पदों पर अनुसूचित जाति, जनजाति, पिछड़ा वर्ग और महिलाओं के लिए आरक्षण क्रमवार रोटेशन प्रणाली से होगा। यदि कोई पंचायत या वार्ड पिछली बार किसी वर्ग के लिए आरक्षित रहा है, तो इस बार उसे सामान्य रखा जाएगा। पूरी आरक्षण प्रक्रिया 2011 की जनगणना पर आधारित होगी।

पंचायत प्रधान के लिए ऐसे तय किया जाएगा रोस्टर
नए प्रावधानों के अनुसार पंचायत प्रधान के आरक्षण की गणना विकास खंड स्तर पर अनुसूचित जाति, जनजाति और पिछड़ा वर्ग की जनसंख्या के आधार पर होगी। सबसे पहले अनुसूचित जाति के लिए आरक्षण रोस्टर लागू किया जाएगा। जिन पंचायतों में अनुसूचित जाति की जनसंख्या अधिक होगी, वहां प्रधान पद पहले आरक्षित किए जाएंगे। यदि किसी पंचायत में अनुसूचित जाति की जनसंख्या पांच प्रतिशत से कम है, तो वह पद इस वर्ग के लिए आरक्षित नहीं होगा।

हिमाचल प्रदेश में पंचायतीराज संस्थाओं के चुनाव में नया आरक्षण रोस्टर लागू किया जाएगा। इससे पंचायत चुनाव प्रक्रिया को लेकर बनी अनिश्चितता पूरी तरह समाप्त हो गई है।

फीसदी पद एससी में महिलाओं के लिए 
अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित कुल पदों में से 50 प्रतिशत पद महिलाओं के लिए रहेंगे। जिस पंचायत में अनुसूचित जाति की महिलाओं की संख्या सबसे अधिक होगी, वहां पहला पद आरक्षित किया जाएगा। अनुसूचित जाति और जनजाति वर्ग के लिए पहले सुरक्षित स्थान तय किए जाएंगे, उसके बाद महिलाओं के लिए आरक्षण लागू होगा। यदि किसी पंचायत क्षेत्र में अनुसूचित जाति या जनजाति की जनसंख्या कम है, तो सामान्य वर्ग की महिलाओं को प्राथमिकता दी जाएगी।

जनसंख्या अनुपात बनेगा आधार
पंचायतों में प्रतिनिधियों के अलावा पंचायत समिति और जिला परिषद सदस्यों के निर्वाचन क्षेत्रों और वार्डों का आरक्षण भी जनसंख्या अनुपात के आधार पर किया जाएगा।

Vishal Verma

20 वर्षों के अनुभव के बाद एक सपना अपना नाम अपना काम । कभी पीटीसी चैनल से शुरू किया काम, मोबाईल से text message के जरिये खबर भेजना उसके बाद प्रिंट मीडिया में काम करना। कभी उतार-चड़ाव के दौर फिर खबरें अभी तक तो कभी सूर्या चैनल के साथ काम करना। अभी भी उसके लिए काम करना लेकिन अपने साथियों के साथ third eye today की शुरुआत जिसमें जो सही लगे वो लिखना कोई दवाब नहीं जो सही वो दर्शकों तक