केंद्र की ₹10 करोड़ अनुदान योजना अधर में, ठियोग–सोलन–सिरमौर के किसानों को बड़ा नुकसान :संदीपनी
शिमला, भाजपा प्रवक्ता संदीपनी भारद्वाज ने हिमाचल प्रदेश राज्य कृषि विपणन बोर्ड (HPSAMB) के अंतर्गत चल रहे इंटीग्रेटेड कोल्ड चेन और वैल्यू एडिशन प्रोजेक्ट में गंभीर अनियमितताओं और प्रशासनिक लापरवाही का आरोप लगाते हुए कांग्रेस सरकार को कठघरे में खड़ा किया है। उन्होंने कहा कि यह परियोजना विशेष रूप से सब्जी और बागवानी उत्पादकों को आधुनिक कोल्ड स्टोरेज, ग्रेडिंग, आईक्यूएफ (Individual Quick Freezing) और रेफ्रिजरेटेड परिवहन सुविधा देने के उद्देश्य से बनाई गई थी, लेकिन सरकार की ढिलाई से अब यह पूरी योजना संकट में पड़ गई है।
संदीपनी भारद्वाज ने बताया कि वर्ष 2020 में भारत सरकार के खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय द्वारा इस इंटीग्रेटेड कोल्ड चेन परियोजना को स्वीकृति दी गई थी और ₹10 करोड़ की केंद्रीय ग्रांट मंजूर की गई। परियोजना की कुल लागत लगभग ₹60 करोड़ निर्धारित की गई थी, जिसमें एपीएमसी, राज्य एजेंसियों और बैंक ऋण का योगदान शामिल था। परियोजना के तहत 5000 एमटी कोल्ड स्टोरेज, ग्रेडिंग-सॉर्टिंग लाइन, प्री-कूलिंग चैंबर, आईक्यूएफ प्लांट और रेफ्रिजरेटेड वाहनों की व्यवस्था की जानी थी।
उन्होंने कहा कि मंत्रालय द्वारा बार-बार आवश्यक दस्तावेज और अनुपालन रिपोर्ट मांगी गई, लेकिन संबंधित एजेंसियां समय पर शर्तें पूरी करने और जानकारी अपलोड करने में विफल रहीं। परिणामस्वरूप मार्च 2024 में परियोजना रद्द कर दी गई थी, जिसे बाद में जनहित को देखते हुए पुनः बहाल किया गया। जनवरी 2025 में लगभग ₹6.17 करोड़ की पहली और दूसरी किस्त जारी भी हुई, लेकिन उसके बावजूद प्रोजेक्ट धरातल पर पूरा नहीं हो पाया।
भाजपा प्रवक्ता ने आरोप लगाया कि परियोजना के दूसरे चरण — जिसमें आईक्यूएफ लाइन, मटेरियल हैंडलिंग इक्विपमेंट और रेफ्रिजरेटेड लॉजिस्टिक्स शामिल थे — में लगभग ₹23 करोड़ का फंड शॉर्टफॉल बताया गया। इसी कारण आईक्यूएफ प्लांट, फ्रीजिंग लाइन और रेफ्रिजरेटेड गाड़ियां नहीं खरीदी गईं। नतीजतन पूरा कोल्ड चेन सिस्टम अधूरा रह गया और किसान इस सुविधा से वंचित रह गए।
उन्होंने कहा कि 27 नवंबर 2025 को भारत सरकार के मंत्रालय द्वारा आधिकारिक शो-कॉज नोटिस जारी कर गैर-क्रियान्वयन पर जवाब मांगा गया है और स्पष्ट चेतावनी दी गई है कि शर्तें पूरी न होने पर परियोजना रद्द कर दी जाएगी तथा जारी की गई ग्रांट राशि 10% ब्याज सहित वापस ली जा सकती है। यह स्थिति प्रदेश सरकार की गंभीर प्रशासनिक विफलता को दर्शाती है।
संदीपनी भारद्वाज ने विशेष रूप से कहा कि ठियोग, सोलन और सिरमौर जिले की अर्थव्यवस्था बड़े स्तर पर सब्जी उत्पादन पर निर्भर है। हिमाचल का यह क्षेत्र देश में ऑफ-सीजन (off-season) सब्जियों का बड़ा उत्पादक माना जाता है। कोल्ड चेन और आईक्यूएफ फ्रीजिंग सुविधा न लगने के कारण किसानों को अपनी उपज सुरक्षित रखने, प्रोसेसिंग और बेहतर बाजार मूल्य पाने का अवसर नहीं मिल पाया, जिससे उन्हें सीधा आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा।
उन्होंने कहा कि करोड़ों रुपये की केंद्रीय सब्सिडी, बैंक ऋण और राज्य अंशदान के बावजूद परियोजना अधूरी है — मशीनरी नहीं लगी, आईक्यूएफ प्लांट चालू नहीं हुआ, रेफ्रिजरेटेड लॉजिस्टिक्स तैयार नहीं हुआ — यह सब कांग्रेस सरकार की अक्षमता, लापरवाही और किसान विरोधी रवैये का प्रमाण है।
भाजपा प्रवक्ता ने मांग की कि प्रदेश सरकार तुरंत इस पूरे मामले पर श्वेत पत्र जारी करे, जिम्मेदार अधिकारियों और निर्णयकर्ताओं की जवाबदेही तय करे और स्पष्ट करे कि सब्जी उत्पादक किसानों को हुए नुकसान की भरपाई कैसे की जाएगी। उन्होंने कहा कि भाजपा इस मुद्दे को किसान हित और जनहित में मजबूती से उठाती रहेगी।
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