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स्कूली छात्रों की निशुल्क बस सुविधा खत्म, अप्रैल से देने होंगे 236 रुपये; गरीब वर्ग पर पड़ेगी मार

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एक अप्रैल से हिमाचल प्रदेश के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले लाखों विद्यार्थियों को मुफ्त बस सुविधा नहीं मिलेगी। अब इन्हें हिम बस पास बनवाना अनिवार्य है। निशुल्क बस सेवा के लिए शुल्क की अनिवार्यता गरीब वर्ग के विद्यार्थियों पर अतिरिक्त बोझ डाल सकती है।हिमाचल प्रदेश के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले लाखों विद्यार्थियों को मिलने वाली निशुल्क बस सेवा एक अप्रैल से अब मुफ्त नहीं मिलेगी। नई व्यवस्था के तहत विद्यार्थियों को पहले 236 रुपये खर्च कर हिम बस पास बनवाना अनिवार्य होगा, तभी उन्हें मुफ्त बस यात्रा की सुविधा मिल सकेगी।सरकारी स्कूलों में पहली से बारहवीं कक्षा तक करीब 8.50 लाख बच्चे पढ़ते हैं। इनमें से लाखों विद्यार्थी स्कूल दूर होने के चलते एचआरटीसी बसों में आते-जाते हैं। अब इन्हें हिम बस पास बनवाना अनिवार्य है। पास के लिए लोकमित्र केंद्र के माध्यम से आवेदन प्रक्रिया के लिए विद्यार्थियों को अतिरिक्त 40 रुपये की फीस भी देनी पड़ेगी।

निशुल्क बस सेवा के लिए शुल्क की अनिवार्यता गरीब वर्ग के विद्यार्थियों पर अतिरिक्त बोझ डाल सकती है। सरकारी स्कूलों के विद्यार्थियों को बीते कई वर्षों से निशुल्क बस सुविधा का लाभ मिलता आ रहा है। अब एचआरटीसी को घाटे से उबारने के नाम पर नए आदेशों के तहत सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले लाखों विद्यार्थियों के परिवारों पर आर्थिक बोझ डाल दिया गया है। निगम ने ऑनलाइन सुविधा के नाम पर यह नई व्यवस्था लागू की है। इसका सबसे अधिक असर उन गरीब परिवारों के विद्यार्थियों पर पड़ेगा।

प्रदेश सरकार दशकों से गरीब और मध्यम वर्ग के परिवारों से संबंध रखने वाले बच्चों को शिक्षित करने के लिए निशुल्क परिवहन सुविधा, फ्री वर्दी समेत नाममात्र की फीस देकर शिक्षित करने का जिम्मा उठा रही है, लेकिन अब वर्दी योजना में बदलाव के बाद एचआरटीसी की ऑनलाइन सुविधा के नाम पर लाखों अभिभावकों से पास बनवाने के नाम पर करोड़ों रुपये की वसूली करने की तैयारी की जा रही है। इसको लेकर अभिभावकों में खासा रोष है। लोगों का कहना है कि जो परिवार इस राशि का भुगतान करने में सक्षम नहीं हैं, उनके बच्चे इसी वजह से शिक्षा के अधिकार से वंचित रह जाएंगे या फिर उन्हें कई किलोमीटर का पैदल सफर करके स्कूल पहुंचना होगा।

सरकारी स्कूलों के विद्यार्थियों के पहले निशुल्क बनते थे बस पास 
सरकारी स्कूलों के विद्यार्थियों के पहले बस पास निशुल्क बनते थे। बच्चों के पहचान पत्र को प्रबंधन की ओर से संबंधित डिपो के क्षेत्रीय प्रबंधकों के कार्यालय में भेजा जाता था और पहचानपत्र के कॉलम पर काउंटर साइन कर वापस भेजे जाते थे। नई व्यवस्था में विद्यार्थियों के अभिभावकों को ऑनलाइन आवेदन कर हिम बस पास बनवाने होंगे। 31 मार्च के बाद पास नहीं बनवाने वालों को निशुल्क सुविधा नहीं मिलेगी।

गरीब अभिभावकों पर बोझ छात्र अभिभावक मंच के संयोजक विजेंद्र मेहरा ने कहा कि एचआरटीसी को घाटे से उबारने के नाम पर प्रदेश सरकार अब गरीब विद्यार्थियों और उनके अभिभावकों से लूट का यह नया तरीका लेकर आई है। निगम को घाटे से उबारने के लिए प्रदेश सरकार को अतिरिक्त बजट का प्रावधान करना चाहिए न कि आम जनता पर इसका अतिरिक्त बोझ डालना चाहिए। सरकार और अफसरों को अपनी फिजूलखर्चों पर रोक लगानी चाहिए।

Vishal Verma

20 वर्षों के अनुभव के बाद एक सपना अपना नाम अपना काम । कभी पीटीसी चैनल से शुरू किया काम, मोबाईल से text message के जरिये खबर भेजना उसके बाद प्रिंट मीडिया में काम करना। कभी उतार-चड़ाव के दौर फिर खबरें अभी तक तो कभी सूर्या चैनल के साथ काम करना। अभी भी उसके लिए काम करना लेकिन अपने साथियों के साथ third eye today की शुरुआत जिसमें जो सही लगे वो लिखना कोई दवाब नहीं जो सही वो दर्शकों तक