लोक भवन में मनाए गए उत्तर प्रदेश व पूर्वोत्तर राज्यों के स्थापना दिवस
राष्ट्रीय एकता और सांस्कृतिक समरसता की भावना को सशक्त करते हुए शनिवार को लोक भवन में उत्तर प्रदेश, त्रिपुरा, मेघालय और मणिपुर के स्थापना दिवस समारोह भव्य रूप से आयोजित किए गए। यह विशेष कार्यक्रम भारत सरकार की ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ पहल के अंतर्गत संपन्न हुआ, जिसका उद्देश्य देश के विभिन्न राज्यों की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, परंपराओं और साझा मूल्यों को एक मंच पर प्रस्तुत करना रहा।समारोह की गरिमा राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ल एवं लेडी गवर्नर जानकी शुक्ला की गरिमामयी उपस्थिति से और अधिक बढ़ गई। इस अवसर पर उत्तर प्रदेश विधान परिषद के सदस्य धर्मेंद्र भारद्वाज विशेष अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। उन्होंने अपने गृह राज्य उत्तर प्रदेश की संस्कृति और परंपराओं का प्रतिनिधित्व करते हुए इस आयोजन को यादगार बनाया।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ल ने कहा कि विभिन्न राज्यों के स्थापना दिवस मनाने से आपसी सौहार्द, प्रेम और भाईचारे की भावना को मजबूती मिलती है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में शुरू की गई ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ पहल सांस्कृतिक आदान-प्रदान का सशक्त माध्यम बनकर उभरी है, जो देश के नागरिकों को एक-दूसरे की परंपराओं, रीति-रिवाजों और मूल्यों से जोड़ती है। ऐसे आयोजन भारत की अखंडता और राष्ट्रीय एकता को और अधिक सुदृढ़ करते हैं।
राज्यपाल ने हिमाचल प्रदेश में निवास कर रहे उत्तर प्रदेश, त्रिपुरा, मेघालय और मणिपुर के नागरिकों को स्थापना दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं दीं और कहा कि विविधता में एकता ही भारत की सबसे बड़ी ताकत है। कार्यक्रम के दौरान प्रतीकात्मक सांस्कृतिक आदान-प्रदान भी किया गया। विशेष अतिथि धर्मेंद्र भारद्वाज ने उत्तर प्रदेश सरकार के संस्कृति विभाग की ओर से राज्यपाल एवं लेडी गवर्नर को पारंपरिक उपहार एवं स्मृति चिन्ह भेंट किए।
समारोह में विभिन्न राज्यों की सांस्कृतिक विविधता पर आधारित एक लघु वृत्तचित्र प्रदर्शित किया गया, जिसने दर्शकों को भारत की सांस्कृतिक समृद्धि से रूबरू कराया। इसके पश्चात पूजा कला मंच के कलाकारों द्वारा उत्तर प्रदेश की लोक परंपराओं पर आधारित मनमोहक सांस्कृतिक प्रस्तुति दी गई, जिसे दर्शकों ने खूब सराहा। इस अवसर पर अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक ज्ञानेश्वर सिंह, उप महानिरीक्षक पुलिस अंजुम आरा सहित अनेक गणमान्य अधिकारी और अतिथि उपस्थित रहे। कार्यक्रम ने राष्ट्रीय एकता और सांस्कृतिक समन्वय का सशक्त संदेश दिया।
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