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भरमौर में तीन दिन से लापता युवकों में से एक का श,,व बरामद

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हिमाचल के चंबा जिले में स्थित प्रसिद्ध भरमाणी माता मंदिर के ऊपर बर्फ से ढकी चोटियों पर लापता हुए दो भाइयों में से 13 वर्षीय पीयूष की तलाश खत्म हो गई है, लेकिन अफसोस कि वह अब इस दुनिया में नहीं रहा।

बीते शुक्रवार की सुबह मलकौता का 19 साल का विकसित राणा और उसका 13 वर्षीय ममेरा भाई पीयूष कुमार (निवासी घरेड़) श्रद्धा के साथ भरमाणी माता मंदिर के दर्शन करने निकले थे। मंदिर में मत्था टेकने के बाद, युवाओं के नैसर्गिक उत्साह और वीडियो बनाने की चाहत उन्हें पहाड़ियों के उस ऊंचे और खतरनाक हिस्से की ओर ले गई, जहां भारी बर्फबारी के कारण रास्ता बेहद फिसलन भरा और जोखिमपूर्ण था। इसके बाद दोनों का संपर्क दुनिया से कट गया।

प्रशासन और स्थानीय लोगों ने इन मासूमों को बचाने के लिए पाताल-आकाश एक कर दिया था:

जमीनी और हवाई जंग: पहले दिन से ही स्थानीय पुलिस, पर्वतारोहियों की स्पेशल टीम और ग्रामीणों ने शून्य से नीचे के तापमान में सर्च ऑपरेशन शुरू किया।

तकनीक का सहारा: जब पैदल चलना असंभव हुआ, तो आधुनिक ड्रोन्स की मदद ली गई, लेकिन घने कोहरे और धुंध ने उनकी आंखों पर भी पर्दा डाल दिया।

वायुसेना की एंट्री: ऑपरेशन के तीसरे दिन भारतीय वायुसेना के दो हेलीकॉप्टरों ने पहाड़ियों की खाक छानी, लेकिन प्रकृति की कठोरता के आगे हवाई सर्वे भी उस समय नाकाम रहा।

विधायक ने दी दुखद जानकारी

क्षेत्रीय विधायक जनक राज ने सोमवार सुबह इस खबर की पुष्टि की कि रेस्क्यू टीम ने बर्फ के नीचे से छोटे भाई पीयूष कुमार का पार्थिव शरीर बरामद कर लिया है। भारी बर्फबारी और विषम परिस्थितियों के बीच शव को बाहर निकालना सुरक्षा बलों के लिए एक बड़ी चुनौती थी।

वर्तमान स्थिति: विकसित राणा (19 वर्ष) की तलाश अब भी युद्ध स्तर पर जारी है। रेस्क्यू टीमें इस उम्मीद में जुटी हैं कि शायद दूसरे युवक का कोई सुराग मिल सके, हालांकि इलाके में बिछी बर्फ की सफेद चादर इस काम को हर पल कठिन बना रही है।

Vishal Verma

20 वर्षों के अनुभव के बाद एक सपना अपना नाम अपना काम । कभी पीटीसी चैनल से शुरू किया काम, मोबाईल से text message के जरिये खबर भेजना उसके बाद प्रिंट मीडिया में काम करना। कभी उतार-चड़ाव के दौर फिर खबरें अभी तक तो कभी सूर्या चैनल के साथ काम करना। अभी भी उसके लिए काम करना लेकिन अपने साथियों के साथ third eye today की शुरुआत जिसमें जो सही लगे वो लिखना कोई दवाब नहीं जो सही वो दर्शकों तक