कांगड़ा में मानसून की पहली भारी बारिश ने छीन ली कई जिंदगियां, नदी-नालों किनारे निर्माण पड़ा भारी
मानसून की पहली बारिश ने ही कई जिंदगियां छीन ली हैं। आपदा से पूर्व के प्रबंध कितने कारगर हुए हैं, यह तो सब सामने आया ही है। साथ ही मानवीय गलतियां व चूक भी हावी रही है। नदियों व खड्डों नालों के साथ सटकर भवन बनाने व रिहायश करना कितना घातक है यह खड्ड नालों में आए पानी के सैलाब ने नुकसान का तांडव रचकर बता दिया है। अब तक मानसून 11 लोगों की जान ले चुका है और 141 लोगों को प्रशासन ने बचाने में सफलता हासलि की है।

12 जुलाई को हुई भारी बारिश ने चैतड़ू, रुलेहड़ में कई भवनों को नुकसान पहुंचाया है तो भागसू में कई वाहनों को नुकसान पहुंचा है। करेरी झील के पास फंसे पचास लोगों में से 49 को निकाल लिया है तो एक की मौत हुई है। उपायुक्त कांगड़ा ने सभी उपमंडलों को अलर्ट रहने के निर्देश दिए हैं। आपदा से निपटने के लिए मशीनरी व अन्य तैयारियां रखने को कहा है। पानी, बिजली व बदहाल मार्गों को प्रशासन धीरे धीरे बहाल कर रहा है।

12 जुलाई को हुई बारिश के कारण रुलेहड़ गांव में हुए भूस्खलन की चपेट में आने से नौ लोगों की जान जा चुकी है और पांच को बचाया जा चुका है व एक अब भी लापता है। कांगड़ा के समीरपुर में खड्ड में बहे व्यक्ति का अब तक कोई सुराग नहीं लग पाया है। नगरोटा बगवां के तहत चाहड़ी गांव में नाले में बहने से बच्ची की मौत हुई है। जिलेभर में विभिन्न स्थानों में फंसे 141 लोगों को अब तक बचाया जा चुका है।

करेरी झील के नजदीक फंसे 50 लोगों में से एक की मौत हुई है, जबकि 49 को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया है। राजोल में गज खड्ड की चपेट में आए चार लोगों तथा तत्वानी में एक व्यक्ति को बचाया है। धर्मशाला उपमंडल के घेरा में भूस्खलन की चपेट में आए दो व्यक्तियों को बचाया गया है। चैतडू व शिल्ला में बाढ़ से प्रभावित 382 लोगों के लिए बगली में राहत कैंप लगाया है और वहां रहने व खाने की व्यवस्था की गई है।

