ऑनलाइन शॉपिंग में सावधान रहें: शिमला पुलिस ने जारी की साइबर ठगी से बचाव की एडवाइजरी
डिजिटल युग में ऑनलाइन शॉपिंग जहां लोगों की रोजमर्रा की जरूरत बन चुकी है, वहीं साइबर ठग इसी सुविधा का फायदा उठाकर लगातार नए-नए तरीकों से लोगों को निशाना बना रहे हैं। बढ़ते साइबर अपराधों को देखते हुए शिमला पुलिस ने ऑनलाइन खरीदारी को लेकर एक अहम एडवाइजरी जारी की है।
पुलिस के अनुसार उपभोक्ताओं को किसी भी ऑनलाइन ऑफर पर आंख मूंदकर भरोसा नहीं करना चाहिए। असामान्य रूप से अधिक छूट, सीमित समय का दबाव और तत्काल भुगतान के लिए उकसाना अक्सर साइबर ठगी के संकेत होते हैं।
एडवाइजरी में कहा गया है कि ऑनलाइन खरीदारी से पहले संबंधित वेबसाइट का यूआरएल, सिक्योरिटी सर्टिफिकेट और कस्टमर रिव्यू अवश्य जांचें। शातिर साइबर अपराधी सोशल मीडिया, मैसेजिंग ऐप और ई-मेल के माध्यम से भारी छूट वाले विज्ञापनों के जरिए लोगों को जाल में फंसा रहे हैं। इसके लिए नामी ई-कॉमर्स कंपनियों की तर्ज पर फर्जी वेबसाइट और मोबाइल ऐप तैयार किए जाते हैं, जिन पर 70 से 90 प्रतिशत तक की छूट दिखाई जाती है।
पुलिस के अनुसार जैसे ही उपभोक्ता भुगतान करता है, उसके बाद न तो ऑर्डर कन्फर्मेशन मिलता है और न ही कोई संपर्क नंबर सक्रिय रहता है। कई मामलों में ठग सोशल मीडिया पर स्पॉन्सर्ड विज्ञापन चलाकर फर्जी लिंक के जरिए लोगों को नकली वेबसाइट पर पहुंचा देते हैं, जो दिखने में पूरी तरह असली प्रतीत होती है।
भुगतान के दौरान ठग बैंक डिटेल, कार्ड जानकारी और ओटीपी हासिल कर लेते हैं, जिसके बाद पीड़ित के खाते से रकम निकाल ली जाती है। कुछ मामलों में इन लिंक के जरिए मोबाइल फोन में मेलवेयर भी इंस्टॉल हो जाता है, जिससे ठग फोन में मौजूद निजी जानकारी, पासवर्ड और बैंक से जुड़े मैसेज तक एक्सेस कर लेते हैं।
पुलिस ने लोगों से अपील की है कि किसी भी संदिग्ध लिंक पर क्लिक न करें, अनजान वेबसाइट पर भुगतान करने से बचें और साइबर ठगी की आशंका होने पर तुरंत पुलिस या साइबर हेल्पलाइन से संपर्क करें।
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