हिमाचल में छह महीने बाद हटा डिजास्टर एक्ट, पंचायत और नगर निकाय चुनाव की तैयारी तेज़
हिमाचल प्रदेश सरकार ने करीब छह महीने बाद राज्य में लागू डिजास्टर मैनेजमेंट एक्ट के तहत जारी आदेश को वापस ले लिया है। राजस्व विभाग की आपदा प्रबंधन शाखा की ओर से जारी अधिसूचना में कहा गया है कि 8 अक्तूबर 2025 को मानसूनी वर्षा से हुए भारी नुकसान और प्रदेशभर में कटी-पिटी सड़कों व बाधित संपर्क व्यवस्था को देखते हुए जो आदेश जारी किया गया था, उसे अब वापस लिया जाता है। उस समय सरकार ने कहा था कि जब तक पूरे प्रदेश में संपर्क व्यवस्था सामान्य नहीं हो जाती, तब तक पंचायती राज संस्थाओं के चुनाव नहीं कराए जाएंगे ताकि आम जनता और मतदान कर्मियों को किसी तरह की असुविधा न हो।दरअसल, पिछले साल मानसून के दौरान कई जिलों में भूस्खलन, सड़कें धंसने और पुल बहने जैसी घटनाओं से हालात बिगड़ गए थे। सरकार ने डिजास्टर मैनेजमेंट एक्ट, 2005 का हवाला देते हुए पंचायत और शहरी निकाय चुनावों को आगे बढ़ा दिया था। विपक्ष और कुछ सामाजिक संगठनों ने इसे लोकतांत्रिक प्रक्रिया में देरी बताया था और मामला अदालत तक पहुंचा। इस बीच, हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट में दाखिल जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए अदालत ने राज्य सरकार को संवैधानिक प्रावधानों के अनुरूप पंचायती राज संस्थाओं और शहरी स्थानीय निकायों के पुनर्गठन की प्रक्रिया तय समय में पूरी करने के निर्देश दिए थे। हाईकोर्ट ने कहा था कि 28 फरवरी 2026 तक जरूरी प्रक्रियाएं पूरी कर ली जाएं और उसके बाद आठ सप्ताह के भीतर चुनाव कराए जाएं।
राज्य सरकार इस आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंची थी। लेकिन 13 फरवरी 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने साफ कर दिया कि चुनाव टालने के लिए परिसीमन का अधूरा काम कोई वैध कारण नहीं हो सकता। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायाधीश जॉयमाल्या बागची की खंडपीठ ने कहा कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया में अनावश्यक देरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। अदालत ने हाईकोर्ट के फैसले को सही ठहराते हुए सरकार की समय बढ़ाने की मांग खारिज कर दी।
हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने समयसीमा में आंशिक संशोधन करते हुए आरक्षण रोस्टर तैयार करने की अंतिम तारीख 28 फरवरी से बढ़ाकर 31 मार्च 2026 कर दी। अदालत ने निर्देश दिया कि राज्य चुनाव आयोग, पंचायती राज विभाग, शहरी विकास विभाग और राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण मिलकर 31 मार्च तक सभी लंबित प्रक्रियाएं पूरी करें। इसके बाद आठ सप्ताह के भीतर, यानी हर हाल में 31 मई 2026 तक चुनाव कराए जाएं।
अब जबकि डिजास्टर एक्ट के तहत जारी पुराना आदेश वापस ले लिया गया है और प्रदेश में संपर्क व्यवस्था में काफी सुधार बताया गया है, चुनावी प्रक्रिया को आगे बढ़ाने का रास्ता साफ हो गया है। राज्य में पंचायतों का पांच साल का कार्यकाल 31 जनवरी 2026 को खत्म हो चुका है, जबकि 50 शहरी निकायों का कार्यकाल 18 जनवरी को पूरा हुआ। प्रदेश में कुल 3577 ग्राम पंचायतें, 90 पंचायत समितियां, 11 जिला परिषद और 71 शहरी स्थानीय निकाय हैं। फिलहाल इन सभी में प्रशासक नियुक्त हैं।
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