स्मार्ट मीटर पर गहराया विवाद : कर्मचारियों-पेंशनरों को प्राथमिकता के फैसले पर बवाल
हिमाचल प्रदेश में स्मार्ट मीटर लगाने को लेकर विवाद बढ़ता जा रहा है। बिजली बोर्ड पेंशनर्स फोरम ने कर्मचारियों और पेंशनरों के बिजली मीटर प्राथमिकता के आधार पर स्मार्ट मीटर से बदलने के निर्देशों पर कड़ी आपत्ति जताई है। फोरम ने इसे मनमाना और भेदभावपूर्ण करार देते हुए तुरंत वापस लेने की मांग की है। दरअसल, पिछले कल बिजली बोर्ड ने फील्ड इकाइयों को निर्देश जारी कर बोर्ड के कार्यरत और सेवानिवृत्त कर्मचारियों के घरों में पुराने मीटर पहले चरण में स्मार्ट मीटर से बदलने को कहा है। इसी आदेश के खिलाफ पेंशनर्स फोरम सक्रिय हो गया है। फोरम के अध्यक्ष ए.एस. गुप्ता ने बुधवार को मुख्य अभियंता (ऑपरेशन), कांगड़ा जोन, धर्मशाला को भेजे पत्र में कहा कि यह निर्देश पारदर्शी मानकों पर आधारित नहीं हैं और बिजली अधिनियम, 2003 की धारा 47(5) की भावना के विपरीत हैं। पत्र में कहा गया है कि किसी एक वर्ग को बिना स्पष्ट और समान रूप से लागू होने वाले मानदंड के प्राथमिकता देना कानूनी रूप से टिकाऊ नहीं माना जा सकता। फोरम ने यह भी सवाल उठाया कि कर्मचारियों और पेंशनरों के मीटर पहले बदलने से आम जनता में जागरूकता आने की बात तर्कसंगत नहीं है। उनका कहना है कि इससे उल्टा संदेश जाता है कि स्मार्ट मीटर को लेकर खुद विभाग में आशंकाएं हैं, इसलिए आम उपभोक्ताओं में विरोध देखा जा रहा है।
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