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किन्नौर कैलाश से टूटा हिमखंड, रिब्बा में मची अफरा-तफरी, इन क्षेत्रों में हिमस्खलन की संभावना

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प्रकृति की खूबसूरती जब रौद्र रूप लेती है, तो मंजर कितना भयावह हो सकता है, इसकी एक झलक सोमवार को किन्नौर के रिब्बा गांव में देखने को मिली। दोपहर का वक्त था, जब किन्नौर कैलाश की गगनचुंबी चोटियों से बर्फ का एक विशाल सैलाब शोर मचाता हुआ नीचे की ओर बढ़ा। यह बर्फीला तूफान (एवललांच) देखते ही देखते नाले में समा गया। गनीमत रही कि इस कुदरती कहर ने किसी की जान नहीं ली, लेकिन इससे उठी बर्फ की धूल और बर्फीली लहरों ने स्थानीय लोगों के रोंगटे खड़े कर दिए।

दहशत का ‘सफेद गुबार’

प्रत्यक्षदर्शियों की मानें तो यह हादसा इतना अचानक था कि संभलने का मौका तक नहीं मिला। जैसे ही बर्फ का पहाड़ नीचे गिरा, पूरा इलाका सफेद धुंध की चादर में लिपट गया और तेज बर्फीली हवाओं ने रिब्बा के बाशिंदों को घरों में दुबकने पर मजबूर कर दिया। फिलहाल किसी तरह की संपत्ति के नुकसान की खबर नहीं है, लेकिन इस घटना ने घाटी में डर का माहौल पैदा कर दिया है।

मौसम विज्ञानियों की मानें तो खतरा अभी टला नहीं है। अगले 24 घंटों के लिए एक गंभीर चेतावनी जारी की गई है। जमीनी हकीकत यह है कि:

ऊंचाई का जोखिम: 3000 मीटर से ऊपर के इलाकों में बर्फ की परतें अब बेहद कच्ची और अस्थिर हो चुकी हैं।

प्रभावित क्षेत्र: किन्नौर के अलावा लाहौल-स्पीति और चंबा के दुर्गम इलाकों पर भी हिमस्खलन की तलवार लटक रही है।

तापमान का खेल: गिरता पारा और लगातार हो रही बर्फबारी ने ढलानों को खतरनाक बना दिया है।

प्रशासन की सख्त हिदायत

खतरे की गंभीरता को देखते हुए जिला प्रशासन ने ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति अपनाई है। पर्यटकों और स्थानीय निवासियों के लिए जारी परामर्श में स्पष्ट कहा गया है:

गैर-जरूरी सफर से बचें: ऊंचाई वाले रास्तों और बर्फीले ढलानों की ओर बिल्कुल न जाएं।

सतर्कता ही बचाव: सीमावर्ती क्षेत्रों में रहने वाले लोग मौसम की पल-पल की अपडेट रखें।

पर्यटक ध्यान दें: एडवेंचर या ट्रेकिंग के शौक के लिए अपनी जान जोखिम में न डालें।

विशेषज्ञों का कहना है कि ढलानों पर जमी बर्फ का बोझ बढ़ चुका है, जो कभी भी विनाशकारी रूप ले सकता है। ऐसे में सुरक्षा ही एकमात्र उपाय है।

Vishal Verma

20 वर्षों के अनुभव के बाद एक सपना अपना नाम अपना काम । कभी पीटीसी चैनल से शुरू किया काम, मोबाईल से text message के जरिये खबर भेजना उसके बाद प्रिंट मीडिया में काम करना। कभी उतार-चड़ाव के दौर फिर खबरें अभी तक तो कभी सूर्या चैनल के साथ काम करना। अभी भी उसके लिए काम करना लेकिन अपने साथियों के साथ third eye today की शुरुआत जिसमें जो सही लगे वो लिखना कोई दवाब नहीं जो सही वो दर्शकों तक