आध्यात्मिक जीवन से नारी का समाज में योगदान अतुलनीय
आध्यात्मिक जीवन से नारी का समाज में योगदान अतुलनीय
आध्यात्मिकता ही मानव एकता को मजबूती दे सकती है तथा मानव को मानव के निकट लाकर आपसी प्रेम और सौहार्द का वातावरण बना सकी है।
इसी मन्तव्य से सतगुरु माता सुदीक्षा जी महाराज एवं निरंकारी राज पिता जी की शिक्षाओं से प्रेरित सन्त निरंकारी मण्डल के जोन नम्बर 5A सोलन में जोन स्तरीय महिला समागम का आयोजन किया गया! इस संत समागम में जिला सिरमौर व सोलन की विभिन्न ब्रांचों से आई महिलाएं इस दिव्य संत समागम में सम्मिलित हुईं और सभी ने सत्संग के माध्यम से आध्यात्मिक आनंद की दिव्य अनुभूति प्राप्त की।
इस अवसर पर दिल्ली से आई बहन अनीता वाधवा ने कार्यक्रम की अध्यक्षता कि व सतगुरू के पावन संदेश द्वारा अपने सम्बोधन में कहा कि अध्यात्म में महिलाओं का योगदान युगों-युगों से अत्यंत महत्वपूर्ण और अनुकरणीय रहा है। वे न केवल भक्ति, साधना और योग के माध्यम से स्वयं को जागृत करती हैं, बल्कि परिवार व समाज में निस्वार्थ सेवा, प्रेम, करुणा और नैतिक मूल्यों का प्रसार भी करती हैं, वहीं सृजन, समर्पण और सहनशीलता की प्रतीक बनकर मानवता को आध्यात्मिक दिशा प्रदान करती हैं। इस प्रकार, महिलाओं के लिए आध्यात्मिक उन्नति का प्रयास न केवल व्यक्तिगत लाभदायक है, बल्कि समाज के लिए भी महत्वपूर्ण है। महिलाओं का आध्यात्मिक विकास एक संतुलित, स्वस्थ और समृद्ध समाज के निर्माण में मदद करता है, नारी रूप में सतगुरू माता सुदीक्षा जी महाराज आज स्वयं इसका उदारण प्रस्तुत कर रही हैं।

